मोहब्बत की कहानी
March 19, 2008 at 4:49 pm 2 comments
के कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये मेरा दिल समझता है, या तेरा दिल समझता है,
के मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आँसूं हैं,
जो तू समझे तो मोटी हैं, जो न समझे तो पानी हैं,
के समंदर पीर के अन्दर है जो रो नही सकता,
ये आँसूं प्यार के मोती हैं इसको खो नही सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता,
के ब्रह्मर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा!
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1.
Sandeep Sinha | March 19, 2008 at 6:57 pm
NSIT ( Netaji subas Institute of technology ) hasya kavi sam melan … ek patla sa kavi tha yeh …
maine 2 saal pehle suni thi yeh …
shashma lagta tha
ab gussa to mat ho yaar
aur delete mat karna
2.
Tosha | April 26, 2008 at 4:41 pm
Bahut hi pyara likha hai aap ne …
Dil ke gubar hakhiqut main badal jaye ho wakey humgama ho gayega.